प्रेग्नेंसी को करें इंजॉय...

प्रेग्नेंसी को करें इंजॉय...

प्रेग्नेंसी में पति-पत्नी को रिलेशन बनाना चाहिए या नहीं, इसे लेकर लोगों के मन में बहुत से भ्रम और सवाल पैदा होते हैं। एक स्टडी के अनुसार प्रेग्नेंसी के 36 हफ्ते के बाद पति-पत्नी को आपस में फिजिकल नहीं होना चाहिए। आखिरी के चार महीने यह सब अवॉयड करना चाहिए। वहीं डॉक्टर्स के मुताबिक यह केस टू केस डिपेंड करता है कि प्रेग्नेंट महिलाएं प्रेग्नेंसी की किस स्टेज तक पति के साथ फिजिकल हो सकती हैं। कुछ केसेस में नौवें महीने तक भी पति-पत्नी आपस में फिजिकल हो सकते हैं। ऐसे में सही रहेगी एक एक्सपर्ट की राय।

अगर प्रेग्नेंसी नॉर्मल है (इसमें कोई कॉम्पलिकेशन नहीं है) और बच्चा हेल्दी है तो रिलेशन बनाना सेफ रहेगा। वहीं अगर प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने ब्लीडिंग हो जाए पर पेट में बच्चा सेफ है, तो भी रिलेशन बनाने से बचना चाहिए। अगर यह ब्लीडिंग तीसरे महीने के बाद हो रही है और प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा प्रेविया (बच्चे का मुंह यूट्रस के मुंह से जुड़ा है) हो तो डॉक्टर प्रेग्नेंसी में रिलेशन न बनाने की सलाह देते हैं। इन सब कॉम्पलिकेशंस से बच्चा भले ही सेफ रहे पर मदर्स में कमजोरी या दूसरी प्रॉब्लम्स आ सकती हैं, क्योंकि इन सब से बचाने के लिए उन्हें मेडिटेशन दी जाती है और अगर हॉर्मोनल इंबैलेंस है तो उन्हें बैलेंस करने के लिए हार्मोस दिए जाते हैं।

इसके अलावा अगर यूट्रस में ट्विन्स हैं, या प्रेग्नेंसी दूसरी बार है और पहली प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन हो चुका है या सर्वाइकल इनकंपिटेंस(यूट्रस का मुंह खुला) है तो भी डॉक्टर्स इसे अवॉयड करने की सलाह देते हैं।

अमूमन प्रेग्नेंसी के पहले और आखिरी के तीन महीनों में महिलाओं की सेक्स के प्रति इच्छा कम हो जाती है।  बीच के तीन महीनों में वह डॉक्टर्स की सलाह के साथ यह रिलेशन बना सकती हैं। कुछ लोग इस दौरान इस बात से कन्फ्यूज रहते हैं कि रिलेशन बनाते समय कौन सी पोजिशन सेफ है। ऐसे में जिस पोजिशन में प्रेग्नेंट लेडी सहज महसूस करे, वही सही रहती है। पर हां ओरल सेक्स से जरूर बचना चाहिए। क्योंकि इससे वैजाइना के अंदर एयर ब्लो हो जाती है और एयर इंबॉलिज्म हो सकता है।

इससे बच्चे और मां दोनों की जान जा सकती है। इसके अलावा ऐनल सेक्स अवॉयड करें। अगर पार्टनर को सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज है तो भी आपस में रिश्ता बनाने से बचें क्योंकि इससे बच्चे को भी एसटीडी (सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज) हो सकती है। प्रेग्नेंसी में रिलेशन बनाते समय बराबर क्लिंजिंग और हेयर रिमूवल करें ताकि कोई इंफेक्शन न हो। वहीं पोस्ट डिलिवरी इंफेक्शंस और कॉम्पलिकेशंस से बचने के लिए डिलिवरी होने के बाद 6 हफ्ते तक फिजिकल रिलेशन बनाने से बचें।

प्रेग्नेंसी में महिलाओं को कई तरह के मिथ्स का सामना करना पड़ता है। ये न करो वो न करो, ये न खाओ वो न खाओ वगैरह वगैरह। इसके अलावा प्रेग्नेंसी ठहरते ही परिवार वालों के अलावा, दोस्तों और रिश्तेदारों से कई तरह की नसीहतें भी मिलती हैं। पर खुद की और पेट में पल रहे बच्चे की अच्छी सेहत के लिए महिला को इन सब बातों को नजरअंदाज करना चाहिए। तब तक इनकी तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए जब तक कि कोई मैडीकल प्रैक्टिशनर कोई ठोस सलाह न दे।

यह होती हैं मिथ्य
 
आमतौर पर यह मिथ होती है कि प्रेग्नेंसी हो गई है, इसे पहले तीन महीने तक सीक्रेट रखना चाहिए। जबकि ऐसा करने से आप अनहोनी को नहीं टाल सकते। सीक्रेट रखने का कोई साइंटिफिक कारण नहीं होता।

लोग सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी में पपीता, खजूर, खुरमानी, अंडा जैसी गर्म चीजें नहीं खानी चाहिए। यह गलत है। सीमित मात्रा में लिया कुछ भी हानिकारक नहीं है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी में बॉडी का मैकेनिज्म अच्छा होता है। सब कुछ खुद ही सीमित मात्रा में खाया जाता है।
 
लोग अकसर एक्सरे और अल्ट्रा साउंड के बीच कन्फ्यूज होते हैं। प्रेग्नेंसी में एक्सरे नहीं कराना चाहिए क्योंकि इसमें रेडिएशन होती है। पर अल्ट्रा साउंड का कोई बुरा असर नहीं होता।

प्रेग्नेंसी में अकसर कहते हैं कि दो के लिए खाना चाहिए। पर ऐसा कुछ नहीं है। रूटीन में हमें 1800 कैलोरीज की जरूरत होती है और प्रेग्नेंसी में इससे सिर्फ 300 अधिक। सीमित मात्रा में चाय/कॉफी का सेवन नुकसान नहीं पहुंचाता।

यह धारणा है कि नाभि के नीचे की ओर पेट पर लकीर है, खाने में नमकीन पसंद है या चेहरा डल दिखता है तो लड़का होगा। यह लकीर ऊपर की ओर है, महिला को खाने में मीठा पसंद है, चेहरा ग्लो करता है तो लड़की पैदा होगी। इसका कोई साइंटिफिक रीजन नहीं है।
 
जरूरी नहीं है कि गर्भ में भारी बच्चा ही अच्छा होता है। डिलिवरी से पहले शिशु का आदर्श वजन 3-5 किलो होना चाहिए। इससे अधिक है तो सिजेरियन के चांसेस बढ़ जाते हैं। प्रेग्नेंसी ठहरने के बाद कभी भी काम करना बंद नहीं करना चाहिए जब तक कि डॉक्टर की राय न हो। डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेग्नेंसी में स्टैमिना जरूर कम हो जाता हैपर बिना थके प्रेग्नेंट महिला काम कर सकती है।
 
यह भी मिथ है कि सूर्य ग्रहण में बाहर जाने से बच्चे को क्लेफ्ट पैलेट 5 होता है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।

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